📦 दिव्य बृहद गंगाधर चूर्ण (50 ग्राम) क्या है?
यह पतंजलि आयुर्वेद की एक विशेष हर्बल औषधि है, जो खासतौर पर पेट और आंतों की समस्याओं के लिए उपयोगी है। यह आयुर्वेदिक ग्रंथों में वर्णित प्रसिद्ध योग है, जिसमें पाचन तंत्र को मजबूत करने और अतिसार (डायरिया) जैसी समस्याओं को दूर करने की अद्भुत क्षमता है।
🌿 मुख्य घटक (Ingredients):
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धाय फूल
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मोचरस
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सौंफ
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धनिया
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लोध्र
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प्रियंगु
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अनार का छिलका
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बिल्व
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अतीस
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नागरमोथा
✅ मुख्य फ़ायदे (Benefits in Hindi):
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अतिसार (डायरिया) में लाभकारी
पतले दस्त और पेट दर्द में तुरंत असर करता है। -
आंव वाली दस्त (द्रवी अतिसार) में उपयोगी
आंव और बलगम वाले दस्त में लाभ पहुंचाता है। -
पेट की जलन और ऐंठन में राहत
पेट में मरोड़ और जलन को कम करता है। -
पाचन शक्ति को मजबूत करता है
पाचन तंत्र को संतुलित करके भूख बढ़ाता है। -
आंतों की सूजन (Colitis) में लाभ
आंतों में होने वाली सूजन और संक्रमण में असरकारी। -
अजीर्ण, दस्त और बवासीर के लक्षणों में आराम
📌 सेवन विधि (How to Take):
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बड़ों के लिए:
2-3 ग्राम (आधा से एक छोटी चम्मच) दिन में 2-3 बार, गुनगुने पानी या छाछ के साथ। -
बच्चों के लिए:
चिकित्सक की सलाह अनुसार।
⚠️ सावधानियाँ:
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लगातार अधिक मात्रा में सेवन न करें।
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गर्भवती महिलाएं और गंभीर रोगी डॉक्टर की सलाह लें।
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ठंडी, सूखी जगह पर रखें।
📖 दिव्य बृहद गंगाधर चूर्ण क्या है?
यह एक शुद्ध आयुर्वेदिक हर्बल चूर्ण है, जिसे प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार पतंजलि ने निर्मित किया है। इसका उपयोग मुख्यतः अतिसार (डायरिया), पेचिश (Dysentery), आंव वाले दस्त, और आंतों के विकारों में किया जाता है। इसके प्राकृतिक औषधीय तत्व पाचन तंत्र को संतुलित करते हैं और आंतों की सूजन व संक्रमण को दूर करने में मदद करते हैं।
🌿 मुख्य औषधीय गुण (Therapeutic Properties):
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अतिसारनाशक (Anti-diarrheal)
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दीपन (Appetizer) और पाचन (Digestive)
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शूलहर (Anti-spasmodic) — पेट दर्द व मरोड़ में राहत
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आंतों की सूजन कम करने वाला (Anti-inflammatory)
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आंव व बलगम को नियंत्रित करने वाला
🌱 मुख्य घटक और उनके गुण
| औषधि | लाभ |
|---|---|
| धाय फूल | दस्त और पेचिश में खून व आंव को रोकता है |
| मोचरस | आंतों को ठंडक देता है और सूजन कम करता है |
| सौंफ | पाचन सुधारता है, गैस व पेट फूलना कम करता है |
| धनिया | पेट दर्द और जलन में लाभकारी |
| लोध्र | अतिसार और बवासीर में असरदार |
| प्रियंगु | दस्त रोकने और शरीर को ठंडक देने वाला |
| अनार छिलका | आंतों की कमजोरी दूर करता है और दस्त में लाभकारी |
| बिल्व | अतिसार, पेचिश और पेट की ऐंठन में प्रमुख औषधि |
| अतीस | बुखार और आंव वाले दस्त में लाभकारी |
| नागरमोथा | पाचन क्रिया ठीक करता है, दस्त और गैस में राहत |
✅ मुख्य उपयोग (Indications):
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अतिसार (Diarrhoea)
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पेचिश (Dysentery)
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आंव वाले दस्त (Mucus in stool)
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पेट में मरोड़, ऐंठन व दर्द
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पेट की जलन व एसिडिटी
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आंतों की सूजन (Colitis)
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अजीर्ण (Indigestion)
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गैस व पेट फूलना
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पुरानी दस्त और बवासीर के लक्षण
📌 सेवन विधि (Dosage):
| उम्र/स्थिति | मात्रा | सेवन का तरीका |
|---|---|---|
| वयस्क | 2-3 ग्राम | दिन में 2-3 बार, गुनगुने पानी या छाछ के साथ |
| बच्चों के लिए | 500 mg – 1 gm | डॉक्टर की सलाह अनुसार |
अधिकतम 7 दिन तक लगातार सेवन करने की सलाह दी जाती है।
⚠️ सावधानियाँ:
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गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं उपयोग से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
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मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर व गंभीर रोगियों के लिए चिकित्सकीय परामर्श अनिवार्य।
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अधिक मात्रा में सेवन दस्त रोकने की बजाय कब्ज उत्पन्न कर सकता है।
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ठंडी, सूखी व अंधेरी जगह पर ही रखें।
📣 प्रमोशनल टैगलाइन (हिंदी में):
“अब दस्त, पेचिश और आंव का सटीक आयुर्वेदिक इलाज — पतंजलि दिव्य बृहद गंगाधर चूर्ण!”
📖 दिव्य बृहद गंगाधर चूर्ण — विस्तार से जानकारी
📜 परिचय (Introduction)
यह चूर्ण आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथों “चरक संहिता” और “भावप्रकाश” में वर्णित एक परंपरागत योग है। इसका प्रमुख उपयोग पेट व आंतों की व्याधियों, विशेषतः अतिसार (Diarrhoea), पेचिश (Dysentery), आंव, पेट की ऐंठन (Spasms), और आंतों की सूजन (Colitis) में किया जाता है।
बृहद गंगाधर का अर्थ है — ऐसा योग जो बड़ी मात्रा में (बृहद) रोगों को हरने वाला (धारक) और रोग नाशक (गंगाधर) हो।
🌿 दोष नाशक प्रभाव (Effect on Doshas)
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वात दोष – शांत करता है
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पित्त दोष – नियंत्रित करता है
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कफ दोष – कम करता है
इसलिए यह त्रिदोष नाशक औषधि मानी जाती है, लेकिन विशेषत: वात और पित्तज विकारों में अधिक असर करती है।
🌱 गुण और कर्म (Properties & Actions)
| गुण (Quality) | प्रभाव |
|---|---|
| दीपन | भूख बढ़ाता है |
| पाचन | पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है |
| शूलहर | पेट दर्द और ऐंठन में आराम |
| अतिसारनाशक | दस्त व आंव को रोकता है |
| संग्रहणीहर | कमजोर आंतों को ताकत देता है |
| सिक्त और उष्णवीर्य | शरीर में उष्मा संतुलित करता है |
✅ रोग विशेष में लाभ (Indications)
📌 अतिसार (Diarrhoea)
जब बार-बार पतले दस्त आएं, भूख न लगे, कमजोरी हो — तब यह चूर्ण आंतों की गतिशीलता को नियंत्रित करता है और मल को गाढ़ा करता है।
📌 पेचिश (Dysentery)
यदि मल में खून, आंव या बलगम आता हो और पेट में मरोड़ व जलन हो — तो इसके सेवन से आंव रुकती है और आंतें सामान्य होती हैं।
📌 पेट की ऐंठन (Colic Pain)
अचानक उठने वाले पेट दर्द व मरोड़ में तत्काल राहत देता है।
📌 आंव (Mucous Stools)
यदि मल में सफेद चिपचिपा आंव या बलगम आता हो — तो इस चूर्ण का सेवन अत्यधिक लाभकारी।
📌 अजीर्ण (Indigestion)
खाना पचने में दिक्कत, गैस, पेट फूलना — इन सभी में यह चूर्ण भूख बढ़ाता है और पाचन सुधरता है।
📌 सेवन की विशेष विधि (Special Method of Administration)
अतिसार व पेचिश में:
👉 2-3 ग्राम चूर्ण + 100 ml गुनगुना पानी या छाछ — दिन में 2-3 बार
आंव व पेट ऐंठन में:
👉 शहद के साथ सेवन करें
बुखार और दस्त दोनों में:
👉 जल जीरा पानी या गुनगुने पानी के साथ
⚠️ अतिरिक्त सावधानियाँ (Precautions)
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गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं बिना डॉक्टर सलाह सेवन न करें।
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उच्च रक्तचाप, ह्रदय रोग या गंभीर रोगियों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही।
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अधिक मात्रा लेने पर कब्ज उत्पन्न हो सकती है।




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